परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) 2026 – जैविक खेती के लिए ₹50,000 प्रति हेक्टेयर सहायता
Ministry of Agriculture & Farmers Welfare द्वारा संचालित परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) भारत सरकार की एक प्रमुख केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य देश में जैविक खेती को बढ़ावा देना, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करना और किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाना है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को 3 वर्षों की अवधि में ₹50,000 प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो क्लस्टर आधारित मॉडल के माध्यम से दी जाती है। यह सहायता जैविक इनपुट (जैविक खाद, जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट आदि), प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, निरीक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया पर खर्च की जाती है।
PKVY के तहत किसानों को PGS-India प्रमाणन प्रणाली के माध्यम से जैविक प्रमाणपत्र दिया जाता है, जिससे उनकी उपज को बाजार में “ऑर्गेनिक” पहचान मिलती है और बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। योजना में सामान्यतः 20 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जाते हैं, जिसमें प्रत्येक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि तक शामिल हो सकता है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, उत्पादन लागत घटती है और किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है। इस प्रकार PKVY न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि प्रशिक्षण, प्रमाणन और विपणन सहयोग के माध्यम से जैविक खेती को एक टिकाऊ आय स्रोत में बदलने का अवसर भी देती है।
योजना का उद्देश्य और क्यों जरूरी है PKVY?
आज के समय में उपभोक्ता रासायनिक मुक्त और पौष्टिक खाद्य पदार्थों की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने PKVY के माध्यम से पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को संगठित रूप दिया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करना, रासायनिक लागत को कम करना, मिट्टी की सेहत सुधारना और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना है। क्लस्टर आधारित मॉडल के तहत 20 हेक्टेयर के समूह में किसानों को संगठित कर सामूहिक रूप से जैविक उत्पादन कराया जाता है, जिससे लागत कम होती है और बाजार तक पहुंच आसान बनती है।
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करना तथा किसानों की आय बढ़ाना है। योजना के अंतर्गत किसानों को PGS-India प्रमाणन प्रणाली के माध्यम से जैविक प्रमाणन प्रदान किया जाता है।
परम्परागत कृषि विकास योजना से मिलने वाले लाभ
इस योजना के अंतर्गत किसानों को 3 वर्षों की अवधि में ₹50,000 प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता क्लस्टर आधारित होती है और इसमें जैविक इनपुट, प्रशिक्षण, प्रमाणन और विपणन सहायता शामिल रहती है। योजना से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता बढ़ती है।
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग बंद होने से खेती की लागत घटती है और लाभांश बढ़ता है। किसानों को PGS-India के तहत जैविक प्रमाणन मिलने से उनकी उपज की बाजार में विश्वसनीयता बढ़ती है और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। साथ ही स्थानीय मंडियों, जैविक बाजारों और राष्ट्रीय स्तर के प्लेटफॉर्म से जुड़ने का अवसर भी मिलता है।
- ₹50,000 प्रति हेक्टेयर (3 वर्ष) तक आर्थिक सहायता (क्लस्टर आधारित)
- जैविक खेती को बढ़ावा एवं मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
- रासायनिक मुक्त और पौष्टिक फसलों का उत्पादन
- खेती की लागत में कमी और आय बढ़ाने में मदद
- PGS-India के तहत जैविक प्रमाणन सुविधा
- स्थानीय व राष्ट्रीय बाजार से जुड़ाव
PKVY पात्रता – कौन किसान आवेदन कर सकता है?
परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत सभी किसान एवं किसान समूह पात्र हैं, बशर्ते वे योजना के अंतर्गत बनाए गए क्लस्टर का हिस्सा हों। व्यक्तिगत किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि तक इस योजना का लाभ ले सकते हैं। किसान के पास वैध भूमि दस्तावेज होना आवश्यक है। यह योजना विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि वे कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त कर सकें।
- सभी किसान एवं किसान समूह पात्र
- व्यक्तिगत किसान के लिए अधिकतम भूमि सीमा: 2 हेक्टेयर
- किसान को PKVY के अंतर्गत बनाए गए क्लस्टर का सदस्य होना आवश्यक
- किसान के पास वैध भूमि दस्तावेज होना चाहिए
परम्परागत कृषि विकास योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया (Step-by-Step)
सबसे पहले इच्छुक किसान अपने नजदीकी जिला कृषि विभाग या PGS-India से जुड़े क्षेत्रीय परिषद से संपर्क करते हैं। इसके बाद क्षेत्रीय परिषद किसानों के आवेदन एकत्र कर क्लस्टर आधारित वार्षिक कार्य योजना (AAP) तैयार करती है। यह प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा जाता है।
केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृति मिलने के पश्चात राज्यों को धनराशि जारी की जाती है। अंततः राज्य सरकार अथवा क्षेत्रीय परिषद द्वारा चयनित क्लस्टर के किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जाता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि योजना में व्यक्तिगत आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते, बल्कि क्लस्टर के माध्यम से ही लाभ दिया जाता है।
Step 01: इच्छुक किसान अपने राज्य/जिला कृषि विभाग या PGS-India से जुड़े क्षेत्रीय परिषद से संपर्क करें।
Step 02: क्षेत्रीय परिषद किसानों के आवेदन एकत्र कर क्लस्टर आधारित वार्षिक कार्य योजना (AAP) तैयार करती है।
Step 03: यह कार्य योजना राज्य सरकार के माध्यम से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजी जाती है।
Step 04: केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृति के बाद राज्यों को धनराशि जारी की जाती है।
Step 05: राज्य सरकार/क्षेत्रीय परिषद द्वारा किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जाता है।
परम्परागत कृषि विकास योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज़
योजना का लाभ लेने के लिए किसान को आधार कार्ड, भूमि से संबंधित दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो जमा करना आवश्यक होता है। यदि किसान SC/ST/OBC वर्ग से संबंधित है तो जाति प्रमाण पत्र भी मांगा जा सकता है।
समूह या क्लस्टर स्तर पर DPR (Detailed Project Report) की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि दस्तावेजों की सूची राज्य के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है।
- आधार कार्ड
- भूमि से संबंधित दस्तावेज
- जाति प्रमाण पत्र (SC/ST/OBC – यदि लागू हो)
- मोबाइल नंबर
- बैंक खाता विवरण
- पासपोर्ट साइज फोटो
- DPR (यदि समूह/क्लस्टर द्वारा मांगा जाए)
नोट: दस्तावेज राज्य और हस्तक्षेप के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण लिंक एवं संपर्क
इस योजना का संचालन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर इसे राज्य कृषि विभाग और PGS-India की क्षेत्रीय परिषदें लागू करती हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं, जहां उन्हें योजना, क्लस्टर गठन और प्रमाणन प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
- मंत्रालय: Ministry of Agriculture & Farmers Welfare
- संपर्क: नजदीकी जिला कृषि कार्यालय
- Guideline
दिशानिर्देश
परम्परागत कृषि विकास योजना पूर्णतः क्लस्टर आधारित है, इसलिए व्यक्तिगत रूप से सीधे आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते। किसानों को जैविक खेती के सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। PGS-India के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रमाणन किया जाएगा और रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा। योजना का लाभ केवल चयनित क्लस्टर के किसानों को ही प्रदान किया जाता है।
- योजना क्लस्टर आधारित है, व्यक्तिगत आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते
- जैविक खेती के सभी नियमों का पालन अनिवार्य
- PGS-India के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रमाणन किया जाएगा
- रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग वर्जित
- योजना का लाभ केवल चयनित क्लस्टर के किसानों को मिलेगा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. क्या परम्परागत कृषि विकास योजना अभी चालू है या बंद हो गई है?
हाँ, परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) वर्तमान में चालू है और इसे Ministry of Agriculture & Farmers Welfare द्वारा देशभर में लागू किया जा रहा है। यह योजना केंद्र प्रायोजित है और विभिन्न राज्यों के कृषि विभागों के माध्यम से क्लस्टर आधारित मॉडल पर संचालित होती है।
सरकार समय-समय पर इस योजना के दिशा-निर्देशों और बजट प्रावधानों में आवश्यक सुधार करती रहती है, ताकि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती से जुड़ सकें। इसलिए किसान अपने नजदीकी जिला कृषि कार्यालय या राज्य कृषि विभाग से संपर्क कर वर्तमान क्लस्टर और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
Q2. परम्परागत कृषि विकास योजना क्या है?
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) भारत सरकार की एक प्रमुख केंद्रीय योजना है, जिसे Ministry of Agriculture & Farmers Welfare द्वारा संचालित किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को जैविक एवं रसायन-मुक्त खेती अपनाने के लिए आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
इस योजना में किसानों को PGS-India के माध्यम से जैविक प्रमाणन भी दिया जाता है, जिससे उनकी उपज को बाजार में बेहतर पहचान और उचित मूल्य मिल सके। PKVY का उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
Q3. परम्परागत कृषि विकास योजना के लिए कौन पात्र है?
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत देश के सभी किसान एवं किसान समूह पात्र हैं, बशर्ते वे योजना के तहत गठित क्लस्टर का हिस्सा हों। यह योजना विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू की जाती है।
एक व्यक्तिगत किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि तक इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकता है। साथ ही, किसान के पास वैध भूमि दस्तावेज होना आवश्यक है और उसे योजना के सभी जैविक खेती संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
Q4. परम्परागत कृषि विकास योजना में आवेदन कैसे करें?
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) में आवेदन सामान्यतः ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, क्योंकि यह योजना क्लस्टर आधारित मॉडल पर संचालित होती है। इच्छुक किसान को अपने नजदीकी जिला कृषि कार्यालय या PGS-India से संबद्ध क्षेत्रीय परिषद से संपर्क करना होता है, जहां से क्लस्टर में शामिल होने की जानकारी दी जाती है।
इसके बाद संबंधित विभाग किसानों के समूह बनाकर वार्षिक कार्य योजना तैयार करता है और स्वीकृति मिलने पर योजना का लाभ प्रदान किया जाता है। ध्यान रहे कि व्यक्तिगत रूप से सीधे ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था नहीं होती, बल्कि चयनित क्लस्टर के माध्यम से ही योजना का लाभ मिलता है।
Q5. क्या परम्परागत कृषि विकास योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन उपलब्ध है?
नहीं, परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) के लिए सामान्य रूप से सीधे ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यह योजना क्लस्टर आधारित है, इसलिए किसानों को व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन फॉर्म भरने के बजाय अपने नजदीकी कृषि विभाग से संपर्क करना होता है।
योजना का संचालन Ministry of Agriculture & Farmers Welfare के मार्गदर्शन में राज्य कृषि विभागों और PGS-India क्षेत्रीय परिषदों के माध्यम से किया जाता है। किसान संबंधित कार्यालय में जाकर क्लस्टर में शामिल होकर ही योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
Q6. परम्परागत कृषि विकास योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत किसानों को तीन वर्षों की अवधि में प्रति हेक्टेयर लगभग ₹50,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि क्लस्टर आधारित मॉडल के तहत दी जाती है, जिसमें जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मदों में सहयोग शामिल रहता है।
यह सहायता जैविक इनपुट, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और PGS-India के माध्यम से प्रमाणन प्रक्रिया पर खर्च की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और जैविक उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य दिलाना है।
Q7. क्या परम्परागत कृषि विकास योजना केवल जैविक खेती के लिए है?
हाँ, परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) विशेष रूप से जैविक और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए ही शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और अन्य हानिकारक रसायनों का उपयोग पूर्णतः वर्जित होता है, ताकि प्राकृतिक तरीकों से खेती को प्रोत्साहन मिल सके।
योजना का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिसमें मिट्टी की सेहत सुधारना, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करना शामिल है। PGS-India के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही जैविक प्रमाणन और उत्पादन प्रक्रिया पूरी की जाती है।
Q8. परम्परागत कृषि विकास योजना में कौन-कौन सी फसलें शामिल हैं?
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत लगभग सभी प्रमुख कृषि फसलें शामिल की जा सकती हैं, बशर्ते उनकी खेती जैविक तरीके से की जाए। इसमें अनाज (गेहूं, धान, मक्का), दालें, तिलहन, सब्ज़ियाँ, फल, मसाले और अन्य पारंपरिक फसलें सम्मिलित हैं, जिन्हें रसायन-मुक्त पद्धति से उगाया जाता है।
यह योजना किसी विशेष फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि क्लस्टर के अनुसार स्थानीय जलवायु और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए फसल चयन किया जाता है। PGS-India के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जैविक मानकों का पालन करते हुए इन फसलों का उत्पादन और प्रमाणन किया जाता है
Q9. परम्परागत कृषि विकास योजना के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) का लाभ लेने के लिए किसान को कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं, जिनमें आधार कार्ड, भूमि से संबंधित वैध दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। ये दस्तावेज किसान की पहचान, भूमि स्वामित्व और सहायता राशि सीधे बैंक खाते में हस्तांतरण के लिए जरूरी होते हैं।
यदि किसान SC/ST/OBC वर्ग से संबंधित है, तो (जहाँ लागू हो) जाति प्रमाण पत्र भी मांगा जा सकता है। आवेदन प्रक्रिया क्लस्टर के माध्यम से होती है, इसलिए दस्तावेज़ों की पुष्टि राज्य कृषि विभाग या PGS-India से संबद्ध क्षेत्रीय परिषद द्वारा की जाती है।
Q10. परम्परागत कृषि विकास योजना किस मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है?
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) का संचालन Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। यह मंत्रालय देश में कृषि विकास, किसानों की आय वृद्धि और टिकाऊ खेती पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ संचालित करता है।
PKVY के माध्यम से मंत्रालय जैविक खेती को प्रोत्साहित करने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने और किसानों को प्रमाणन व विपणन सहायता प्रदान करने का कार्य करता है। राज्य कृषि विभागों और PGS-India की क्षेत्रीय परिषदों के सहयोग से यह योजना पूरे देश में लागू की जाती है।
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