Sarson Bhavantar Yojana – मध्य प्रदेश सरकार ने सरसों किसानों के लिए मूल्य सुरक्षा सुनिश्चित की

मध्य प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ आज भी कृषि है, और सरसों जैसी तिलहन फसलें किसानों की आय में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन कृषि बाजारों में कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण कई बार किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर बेचनी पड़ती है। इसी लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने Sarson Bhavantar Yojana की घोषणा की है, जिसके तहत अब सोयाबीन के साथ-साथ सरसों को भी भावांतर योजना में शामिल किया गया है।

इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के शुभारंभ के दौरान की। इसे सरसों किसानों को बाजार मूल्य जोखिम से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


पृष्ठभूमि: भावांतर योजना क्यों आवश्यक है?

कई मामलों में MSP घोषित होने के बावजूद किसान उस मूल्य पर अपनी फसल बेच नहीं पाते, इसके प्रमुख कारण हैं:

  • सीमित सरकारी खरीद
  • मंडियों में अधिक आवक
  • कमजोर मांग
  • बिचौलियों का प्रभाव

इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए भावांतर (मूल्य अंतर) मॉडल लाया गया। इसमें सरकार हर फसल की भौतिक खरीद करने के बजाय, MSP और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई किसानों को करती है।

सोयाबीन में सफल प्रयोग के बाद अब सरकार ने यही व्यवस्था सरसों की खेती पर भी लागू करने का निर्णय लिया है।


Sarson Bhavantar Yojana क्या है?

Sarson Bhavantar Yojana एक मूल्य कमी भुगतान (Price Deficiency Payment) योजना है, जिसके तहत यदि सरसों का बाजार मूल्य MSP से कम रहता है, तो किसानों को सरकार द्वारा अंतर राशि का भुगतान किया जाएगा।

यह योजना कैसे काम करती है?

  • सरकार सरसों के लिए MSP घोषित करती है
  • किसान पंजीकृत मंडियों में अपनी फसल बेचते हैं
  • यदि मंडी मूल्य MSP से कम होता है, तो
    • सरकार मूल्य अंतर की राशि का भुगतान करती है
    • यह राशि सीधे किसान के बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजी जाती है

इस तरह किसानों को बिना अनिवार्य सरकारी खरीद के MSP स्तर की आय सुनिश्चित होती है।


Sarson Bhavantar Yojana के उद्देश्य

  • सरसों किसानों को मूल्य गिरावट से सुरक्षा
  • तिलहन फसलों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना
  • खुले बाजार में मजबूरी में बिक्री (Distress Sale) को रोकना
  • किसान आय को स्थिर बनाना
  • मध्य प्रदेश में टिकाऊ तिलहन खेती को बढ़ावा देना

मध्य प्रदेश में सरसों उत्पादन की स्थिति

मध्य प्रदेश भारत के प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों में शामिल है।

प्रमुख आंकड़े:

  • औसत वार्षिक सरसों उत्पादन: लगभग 1 लाख मीट्रिक टन
  • पिछला MSP: ₹5,950 प्रति क्विंटल
  • पिछले वर्ष की खरीद: लगभग 50,000 मीट्रिक टन

MSP पर खरीद के बावजूद बड़ी मात्रा में सरसों खुले बाजार में बिकती है, जहाँ कीमतें अस्थिर रहती हैं। भावांतर योजना इसी अंतर को पाटने का प्रयास है।


किसानों के लिए सरसों भावांतर योजना के लाभ

1. आय सुरक्षा

बाजार मूल्य गिरने पर भी किसानों की आय MSP से नीचे नहीं जाएगी।

2. खरीद पर निर्भरता में कमी

किसानों को केवल सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

3. भुगतान में पारदर्शिता

सीधे बैंक खाते में भुगतान से भ्रष्टाचार और लीकेज कम होगा।

4. तिलहन खेती को प्रोत्साहन

किसान बिना नुकसान के डर के सरसों की खेती जारी रख सकेंगे।


फसल विविधीकरण रणनीति से जुड़ी योजना

घोषणा के दौरान मुख्यमंत्री ने फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कारण:

  • मूंग की खेती में अधिक कीटनाशकों का प्रयोग
  • उत्पादन लागत में वृद्धि
  • पर्यावरणीय चिंताएँ

वैकल्पिक फसलें (MSP सहित):

फसलMSP (₹ प्रति क्विंटल)
मूंगफली₹7,203
उड़द₹7,800

सरकार संतुलित फसल चक्र अपनाने की सलाह दे रही है, जबकि सरसों की खेती को भावांतर सुरक्षा मिलेगी।


मध्य प्रदेश में कृषि भूमि का विस्तार

मध्य प्रदेश हाल के वर्षों में ऐसा एकमात्र राज्य बना है जहाँ कुल कृषि क्षेत्र में वृद्धि हुई है।

मुख्य बिंदु:

  • 2.5 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में वृद्धि
  • बेहतर सिंचाई अवसंरचना
  • जल उपलब्धता में सुधार

इससे सरसों भावांतर जैसी योजनाओं की प्रभावशीलता और बढ़ेगी।

Sarson Bhavantar Yojana in Madhya Pradesh MSP Scheme

नदी जोड़ो परियोजनाओं की भूमिका

दो प्रमुख राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजनाएँ अंतिम चरण में हैं।

अपेक्षित प्रभाव:

  • 25 जिलों में सिंचाई कवरेज
  • 16 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को लाभ
  • वर्षा पर निर्भरता में कमी
  • सरसों और तिलहन उत्पादन में वृद्धि

सोलर पंप योजना से किसानों को समर्थन

सरकार ने बड़े पैमाने पर सोलर पंप वितरण योजना की भी घोषणा की है।

प्रमुख बिंदु:

  • 3 वर्षों में 30 लाख किसानों को सोलर पंप
  • हर वर्ष 10 लाख किसानों को लाभ
  • बिजली लागत में कमी
  • निर्बाध सिंचाई सुविधा

यह सरसों किसानों की उत्पादन लागत घटाने में मदद करेगा।


गेहूं MSP रोडमैप (संबंधित नीति संकेत)

सरसों के साथ-साथ सरकार ने गेहूं के MSP को लेकर भी संकेत दिए हैं।

  • 2028 से पहले लक्ष्य MSP: ₹2,700 प्रति क्विंटल
  • वर्तमान MSP: ₹2,600 प्रति क्विंटल

यह सरकार की दीर्घकालिक किसान-हितैषी नीति को दर्शाता है।


आर्थिक प्रभाव

सरसों भावांतर योजना के दीर्घकालिक प्रभाव:

  • तिलहन उत्पादन में स्थिरता
  • ग्रामीण क्रय शक्ति में वृद्धि
  • किसान ऋण बोझ में कमी
  • मंडियों में बेहतर मूल्य खोज
  • खाद्य तेल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

चुनौतियाँ और क्रियान्वयन से जुड़े पहलू

सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक:

  • मंडी मूल्यों की सटीक रिकॉर्डिंग
  • समय पर भुगतान
  • किसानों में जागरूकता
  • मजबूत डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम

निष्कर्ष

Sarson Bhavantar Yojana 2026 मध्य प्रदेश के सरसों किसानों को बाजार जोखिम से बचाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। सिंचाई विस्तार, सोलर पंप, और MSP सुधारों के साथ मिलकर यह योजना कृषि तंत्र को मजबूत बनाती है और किसानों का विश्वास बढ़ाती है।

सरकार द्वारा खरीद-आधारित समर्थन से हटकर मूल्य अंतर भुगतान मॉडल अपनाना एक अधिक प्रभावी और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण है।

अधिक जानकारी के लिए: dhar.nic.in


Q1. सरसों भावांतर योजना क्या है?

यह एक मूल्य अंतर भुगतान योजना है, जिसमें MSP से कम बाजार मूल्य होने पर किसानों को अंतर राशि दी जाती है।

Q2. सरसों भावांतर योजना की घोषणा किसने की?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष 2026 के दौरान घोषणा की।

Q3. योजना कैसे काम करती है?

किसान मंडी में फसल बेचते हैं, MSP से कम मूल्य होने पर अंतर राशि DBT से मिलती है।

Q4. सरसों का MSP कितना है?

पिछले सीजन में ₹5,950 प्रति क्विंटल था।

Q5. क्या सरकारी खरीद अनिवार्य है?

नहीं, बाजार में बिक्री पर ही भावांतर भुगतान मिलता है।

Q6. किन किसानों को लाभ मिलेगा?

मध्य प्रदेश के पंजीकृत सरसों किसान।

Q7. योजना केवल मध्य प्रदेश में लागू है?

हाँ, फिलहाल केवल मध्य प्रदेश में।

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