मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
Mukhyamantri Swadeshi Gau Samvardhan Yojana उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण पशुपालन प्रोत्साहन योजना है, जिसे Nand Baba Dugdh Mission के अंतर्गत लागू किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाना, प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में सुधार करना और उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा देना है।
सरकार चाहती है कि पशुपालक राज्य के बाहर से उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायें खरीदें, जिससे दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि हो सके। इसके साथ ही यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय के नए अवसर सृजित करने का माध्यम भी है। यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में लागू की जा रही है, जिससे अधिक से अधिक किसान और पशुपालक लाभान्वित हो सकें।
इसके साथ-साथ यह योजना पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने का भी लक्ष्य रखती है। यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में लागू की जाएगी।
योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?
इस योजना के अंतर्गत प्रति इकाई कुल लागत का 40% तक अनुदान दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹80,000 निर्धारित की गई है। एक इकाई में 2 उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी गायें शामिल होती हैं और प्रति इकाई अनुमानित लागत लगभग ₹2 लाख मानी गई है।
अनुदान में केवल गायों की खरीद ही नहीं, बल्कि परिवहन खर्च, पशु बीमा, ट्रांजिट बीमा, चारा काटने की मशीन की खरीद और पशु शेड (गोशाला) निर्माण का खर्च भी शामिल है। चयन के बाद अनुदान राशि DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से एक माह के भीतर सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
- प्रति इकाई कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान
- अधिकतम अनुदान राशि: ₹80,000
अनुदान में शामिल खर्च:
- स्वदेशी गायों की खरीद
- परिवहन खर्च
- पशु बीमा
- चारा काटने की मशीन
- पशु शेड (गोशाला) का निर्माण
महत्वपूर्ण नोट्स
- एक इकाई में 2 उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी गायें शामिल होंगी
(प्रति इकाई अनुमानित लागत लगभग ₹2 लाख) - चयन के बाद अनुदान राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से एक माह के भीतर सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाएगी
पात्रता मापदंड
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए और उसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। आवेदक के पास पशुओं के पालन के लिए पर्याप्त स्थान या शेड उपलब्ध होना आवश्यक है।
महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवेदक के पास पहले से 2 से अधिक उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायें (जैसे गिर, साहीवाल, हरियाणा, थारपारकर) या एफ-1 संकर गायें नहीं होनी चाहिए। गायों की खरीद राज्य के बाहर से की जानी अनिवार्य है और केवल पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली स्वस्थ एवं रोग-मुक्त गायें ही मान्य होंगी।
3 वर्षों का पशु बीमा और परिवहन के दौरान ट्रांजिट बीमा कराना अनिवार्य है, जिससे पशुपालक को किसी अप्रत्याशित नुकसान की स्थिति में सुरक्षा मिल सके।
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए
- आवेदक की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो
- पशुओं के लिए पर्याप्त स्थान / शेड उपलब्ध होना चाहिए
- आवेदक के पास पहले से 2 से अधिक उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायें
(गिर, साहीवाल, हरियाणा, थारपारकर) या एफ-1 संकर गायें नहीं होनी चाहिए - गायों की खरीद राज्य के बाहर से की जानी चाहिए
- केवल पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली स्वदेशी गायें ही मान्य होंगी
- खरीदी गई गायें स्वस्थ एवं रोग-मुक्त होनी चाहिए
- 3 वर्षों का पशु बीमा अनिवार्य है
- परिवहन के दौरान ट्रांजिट बीमा अनिवार्य है
आवेदन प्रक्रिया
सबसे पहले योजना से संबंधित अधिसूचना जारी होने पर इच्छुक आवेदक आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभागीय कार्यालय से आवेदन पत्र (परिशिष्ट-1) प्राप्त करें। आवेदन पत्र में सभी आवश्यक जानकारी भरें और अनिवार्य दस्तावेज संलग्न करें।
इसके बाद पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र मुख्य विकास अधिकारी (CDO) या मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) के कार्यालय में जमा करें। आवेदन जमा करते समय रसीद या पावती अवश्य प्राप्त करें, जिसमें आवेदन की तिथि और संदर्भ संख्या दर्ज हो।
चरण 1
योजना से संबंधित सूचना राज्य स्तर पर जारी की जाएगी। इच्छुक आवेदक आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभागीय कार्यालय से आवेदन पत्र (परिशिष्ट-1) डाउनलोड / प्राप्त करें।
चरण 2
आवेदन पत्र में सभी आवश्यक जानकारी भरें और अनिवार्य दस्तावेज संलग्न करें
(जहाँ आवश्यक हो, स्व-प्रमाणित)।
चरण 3
पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) या
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) के कार्यालय में जमा करें।
चरण 4
आवेदन जमा करते समय रसीद / पावती अवश्य प्राप्त करें, जिसमें आवेदन की तिथि, समय और संदर्भ संख्या अंकित हो।
चयन के बाद की प्रक्रिया
चयन पत्र प्राप्त होने के बाद 2 माह के भीतर स्वदेशी गायों की खरीद करना अनिवार्य है। केवल गिर, साहीवाल, हरियाणा या थारपारकर नस्ल की गायें ही स्वीकार्य होंगी। गायों की पहचान के लिए माइक्रोचिप या ईयर टैगिंग कराना अनिवार्य है।
गाय खरीद से संबंधित सभी कानूनी दस्तावेज लाभार्थी को सुरक्षित रखने होंगे। खरीद के 1 माह के भीतर अनुदान प्राप्त करने के लिए परिशिष्ट-2 के माध्यम से पुनः आवेदन करना होगा।
- चयन पत्र प्राप्त होने के बाद 2 माह के भीतर स्वदेशी गायों की खरीद अनिवार्य
- केवल गिर, साहीवाल, हरियाणा या थारपारकर नस्ल की गायें ही मान्य होंगी
- गायों की पहचान हेतु माइक्रोचिप / ईयर टैगिंग अनिवार्य
- गायों की खरीद से संबंधित सभी कानूनी औपचारिकताएँ एवं अभिलेख लाभार्थी द्वारा रखे जाएंगे
- खरीद के 1 माह के भीतर अनुदान हेतु पुनः आवेदन (परिशिष्ट-2) करना होगा
आवेदन के समय आवश्यक दस्तावेज
आवेदन के साथ पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड की स्व-प्रमाणित प्रति, नोटराइज्ड शपथ पत्र, 2 से अधिक उन्नत स्वदेशी गाय न होने का प्रमाण पत्र तथा पशुपालन हेतु पर्याप्त स्थान का प्रमाण संलग्न करना होगा।
- पासपोर्ट साइज फोटो
- आधार कार्ड की स्व-प्रमाणित प्रति
- नोटराइज्ड शपथ पत्र
- 2 से अधिक उन्नत स्वदेशी गाय न होने का प्रमाण पत्र
- पशुपालन हेतु पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने का प्रमाण
अनुदान वितरण के लिए आवश्यक दस्तावेज
अनुदान जारी करने के लिए गाय खरीद की रसीद, ट्रांजिट बीमा प्रति, परिवहन व्यय रसीद, 3 वर्षों का पशु बीमा प्रमाण पत्र, चारा काटने की मशीन की रसीद, पशु शेड निर्माण खर्च विवरण, माइक्रोचिप/ईयर टैग प्रमाण, पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, 3 वर्षों तक संपत्ति बनाए रखने का शपथ पत्र, बैंक पासबुक/कैंसिल चेक और चयन पत्र की प्रति आवश्यक होगी।
- पासपोर्ट साइज फोटो
- गाय खरीद की रसीद
- ट्रांजिट बीमा की प्रति
- परिवहन व्यय की रसीद
- 3 वर्षों का पशु बीमा प्रमाण पत्र
- चारा काटने की मशीन की खरीद रसीद
- पशु शेड निर्माण खर्च का विवरण
- लाभार्थी का आधार कार्ड
- माइक्रोचिप / ईयर टैग पहचान प्रमाण
- पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
- नोटराइज्ड शपथ पत्र (3 वर्षों तक संपत्ति बनाए रखने की प्रतिबद्धता)
- बैंक पासबुक / कैंसिल चेक
- चयन पत्र की प्रति
महत्वपूर्ण लिंक एवं संपर्क
- Nand Baba Milk Mission – Official Portal
महत्वपूर्ण दिशानिर्देश
लाभार्थी को सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है। योजना का उद्देश्य केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में स्वदेशी नस्ल संरक्षण, दुग्ध उत्पादन वृद्धि और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना पशुपालकों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिससे वे आधुनिक डेयरी मॉडल अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं और राज्य की दुग्ध अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना क्या है?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक पशुपालन योजना है, जो नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य स्वदेशी गायों के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।
Q2. मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना किस राज्य की योजना है?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना उत्तर प्रदेश राज्य की एक अनूठी और महत्वाकांक्षी पशुपालन व दुग्ध विकास योजना है, जिसे विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सरकार ने लागू किया है। यह योजना Nand Baba Dugdh Mission के अंतर्गत संचालित की जा रही है, जिसका लक्ष्य राज्य के दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में सुधार लाना और उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को प्रोत्साहन देना है।
योजना का दायरा उत्तर प्रदेश के सभी जिलों तक विस्तृत किया गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्र के पशुपालकों को इसका लाभ आसानी से मिल सके। उत्तर प्रदेश भारत का एक ऐसा राज्य है जहाँ कृषि और पशुपालन प्रमुख livelihood गतिविधियाँ हैं, इसलिए सरकार ने यह रणनीति तैयार की है कि उन्नत नस्ल की गायों के माध्यम से दूध उत्पादन में वृद्धि हो, रोजगार उत्पन्न हो और स्थानीय दूध उत्पादक अधिक से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकें।
यह योजना पशुपालन व्यवसाय को भी आधुनिक रूप में विकसित करने का अवसर देती है। इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी गायों की खरीद, पशु बीमा, चारा काटने की मशीन और पशु शेड के निर्माण पर अनुदान प्रदान किया जाता है। जिससे न सिर्फ पशुपालक की आय में सुधार होता है, बल्कि गौ-पालन से जुड़े व्यवसायों को भी एक नई दिशा मिलती है।
Q3. मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत कितनी सब्सिडी (अनुदान) मिलती है?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत लाभार्थियों को प्रति इकाई कुल लागत का 40% तक अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया जाता है। इस योजना में अधिकतम अनुदान राशि ₹80,000 प्रति इकाई निर्धारित की गई है।
एक इकाई में सामान्यतः 2 उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी गायें शामिल होती हैं, जिसकी अनुमानित कुल लागत लगभग ₹2 लाख तक हो सकती है। इस कुल लागत का 40% हिस्सा सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिया जाता है, लेकिन यह राशि ₹80,000 से अधिक नहीं होगी।
अनुदान में किन-किन खर्चों को शामिल किया गया है?
योजना के अंतर्गत केवल गायों की खरीद पर ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित आवश्यक खर्चों पर भी सब्सिडी दी जाती है:
* स्वदेशी नस्ल की गायों की खरीद
* परिवहन खर्च
* ट्रांजिट बीमा और 3 वर्ष का पशु बीमा
* चारा काटने की मशीन
* पशु शेड (गोशाला) का निर्माण
यह अनुदान DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाता है, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित होता है।
किसानों और पशुपालकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सब्सिडी?
40% तक की सब्सिडी पशुपालकों के लिए बड़ी आर्थिक राहत साबित होती है। इससे वे कम निवेश में डेयरी व्यवसाय शुरू या विस्तार कर सकते हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह योजना आत्मनिर्भर बनने का एक मजबूत अवसर प्रदान करती है।
Q4. मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना में एक इकाई क्या होती है?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत “एक इकाई” (Unit) का अर्थ है – 2 उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्ल की गायों का समूह, जिसे योजना के मानकों के अनुसार खरीदा और पंजीकृत किया जाता है।
सरकार ने योजना को व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए “इकाई” की स्पष्ट परिभाषा तय की है, ताकि प्रत्येक लाभार्थी को समान आधार पर अनुदान मिल सके।
प्रति इकाई अनुमानित लागत कितनी है?
एक इकाई की अनुमानित कुल लागत लगभग ₹2 लाख मानी गई है। इस लागत में केवल गायों की खरीद ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े अन्य आवश्यक खर्च भी शामिल हो सकते हैं, जैसे:
राज्य के बाहर से स्वदेशी नस्ल की गायों की खरीद
* परिवहन व्यय
* पशु बीमा (3 वर्ष के लिए अनिवार्य)
* ट्रांजिट बीमा
* चारा काटने की मशीन
* पशु शेड (गोशाला) का निर्माण
इकाई की संरचना क्यों महत्वपूर्ण है?
योजना के अंतर्गत प्रति इकाई 2 गायें रखना इसलिए आवश्यक है ताकि लाभार्थी को नियमित दूध उत्पादन मिल सके और डेयरी व्यवसाय आर्थिक रूप से व्यवहार्य बन सके। दो गायों से दूध उत्पादन का संतुलन बना रहता है और आय की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
साथ ही, सरकार प्रति इकाई कुल लागत का 40% (अधिकतम ₹80,000) तक अनुदान प्रदान करती है, जिससे पशुपालक कम पूंजी में अपना डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
संक्षेप में, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना में “एक इकाई” का मतलब 2 उन्नत स्वदेशी गायों का सेट है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹2 लाख है और जिस पर सरकार निर्धारित सीमा तक सब्सिडी प्रदान करती है।
Q5. मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के अंतर्गत किन खर्चों पर अनुदान मिलता है?
अनुदान में निम्नलिखित खर्च शामिल हैं:
* स्वदेशी गायों की खरीद
* परिवहन खर्च
* ट्रांजिट बीमा
* 3 वर्षों का पशु बीमा
* चारा काटने की मशीन
* पशु शेड (गोशाला) का निर्माण
Q6. मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के लिए वही व्यक्ति आवेदन कर सकता है:
* जो उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो
* जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो
* जिसके पास पशुओं के लिए पर्याप्त स्थान / शेड हो
Q7. क्या पहले से गाय रखने वाला व्यक्ति इस योजना में आवेदन कर सकता है?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत पहले से गाय रखने वाला व्यक्ति भी आवेदन कर सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।
सबसे अहम नियम यह है कि आवेदक के पास पहले से 2 से अधिक उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायें या F-1 संकर (Hybrid) गायें नहीं होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के पास पहले से 3 या उससे अधिक उन्नत नस्ल की गायें हैं, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।
किन नस्लों को उन्नत स्वदेशी नस्ल माना गया है?
योजना में आमतौर पर गिर, साहीवाल, हरियाणा और थारपारकर जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों को शामिल किया गया है। यदि आवेदक के पास इन नस्लों की 2 या उससे कम गायें हैं, तो वह योजना के अंतर्गत नई इकाई (2 गायें) के लिए आवेदन कर सकता है।
यह शर्त क्यों रखी गई है?
सरकार का उद्देश्य उन छोटे और मध्यम पशुपालकों को प्राथमिकता देना है, जिनके पास सीमित संसाधन हैं और जो डेयरी व्यवसाय शुरू या विस्तार करना चाहते हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास पहले से अधिक संख्या में उन्नत नस्ल की गायें हैं, तो उसे अपेक्षाकृत सक्षम माना जाता है और योजना का लाभ नए या छोटे पशुपालकों को देने पर जोर दिया जाता है।
आवेदन करते समय क्या ध्यान रखें?
वर्तमान में मौजूद गायों की सही जानकारी दें।
2 से अधिक उन्नत स्वदेशी गायें न होने का प्रमाण पत्र संलग्न करें।
सभी विवरण सत्य और प्रमाणित होने चाहिए, अन्यथा आवेदन निरस्त किया जा सकता है।
संक्षेप में, यदि किसी व्यक्ति के पास पहले से गायें हैं, तो भी वह आवेदन कर सकता है, बशर्ते उसके पास 2 से अधिक उन्नत स्वदेशी या F-1 संकर गायें न हों।
Q8. क्या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत गायें उत्तर प्रदेश से ही खरीदनी होंगी?
नहीं, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत गायों की खरीद उत्तर प्रदेश के बाहर से करना अनिवार्य है। योजना की शर्तों के अनुसार लाभार्थी को उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्ल की गायें अन्य राज्यों से खरीदनी होंगी।
राज्य के बाहर से खरीद अनिवार्य क्यों है?
इस नियम का मुख्य उद्देश्य ऐसी उन्नत और प्रमाणित स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देना है, जिनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता अधिक हो और जिनकी जेनेटिक गुणवत्ता बेहतर हो। कई बार विशेष नस्लें अपने मूल राज्यों में अधिक शुद्ध और उच्च उत्पादकता वाली मिलती हैं, इसलिए सरकार ने बाहरी राज्यों से खरीद को अनिवार्य किया है।
किन नस्लों की खरीद की जा सकती है?
योजना के तहत आमतौर पर गिर, साहीवाल, हरियाणा और थारपारकर जैसी उन्नत स्वदेशी नस्लों को मान्यता दी गई है। ये नस्लें अपनी दूध देने की क्षमता और अनुकूलन शक्ति के लिए जानी जाती हैं।
खरीद के समय किन बातों का ध्यान रखें?
गाय पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली होनी चाहिए।
गाय पूरी तरह स्वस्थ और रोग-मुक्त हो।
परिवहन के दौरान ट्रांजिट बीमा अनिवार्य है।
3 वर्षों का पशु बीमा कराना जरूरी है।
खरीद से संबंधित सभी बिल और दस्तावेज सुरक्षित रखें।
संक्षेप में, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत गायें उत्तर प्रदेश से नहीं, बल्कि राज्य के बाहर से खरीदना अनिवार्य है, ताकि उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा मिल सके और दूध उत्पादन में वास्तविक वृद्धि हो।
Q9. कौन-कौन सी गायों की नस्लें मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना में मान्य हैं?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत केवल चुनिंदा उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी (Desi) गायों की नस्लें ही मान्य हैं। सरकार ने दूध उत्पादन क्षमता, अनुकूलन क्षमता और नस्ल की शुद्धता को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित नस्लों को स्वीकृति दी है:
* गिर (Gir)
* साहीवाल (Sahiwal)
* हरियाणा (Haryana)
* थारपारकर (Tharparkar)
इन नस्लों को ही क्यों चुना गया है?
इन सभी नस्लों को भारत की प्रमुख दुग्ध उत्पादन करने वाली स्वदेशी नस्लों में गिना जाता है। ये नस्लें:
अधिक दूध देने की क्षमता रखती हैं
गर्म और शुष्क जलवायु में भी आसानी से अनुकूलित हो जाती हैं
रोग प्रतिरोधक क्षमता में बेहतर मानी जाती हैं
लंबी उत्पादक आयु प्रदान करती हैं
खरीद के समय ध्यान देने योग्य बातें
गाय शुद्ध स्वदेशी नस्ल की होनी चाहिए।
पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली (First/Second Lactation) हो।
पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
माइक्रोचिप या ईयर टैगिंग कराना आवश्यक है।
यदि कोई अन्य नस्ल या संकर (Hybrid) गाय खरीदी जाती है, तो वह योजना के अंतर्गत मान्य नहीं होगी और अनुदान निरस्त किया जा सकता है।
Q10. कितनी उम्र या अवस्था की गायें खरीदी जा सकती हैं?
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के तहत केवल पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली (First या Second Lactation) स्वदेशी गायें ही मान्य हैं।
इसका अर्थ है कि ऐसी गायें खरीदी जा सकती हैं जो अभी अपने दुग्ध उत्पादन के शुरुआती और उत्पादक चरण में हों। बहुत अधिक उम्र की या कई बार बछड़ा दे चुकी गायें इस योजना के अंतर्गत स्वीकार नहीं की जातीं।
First या Second Lactation ही क्यों अनिवार्य है?
सरकार ने यह शर्त इसलिए निर्धारित की है ताकि:
लाभार्थी को बेहतर और स्थिर दूध उत्पादन मिल सके।
गाय की उत्पादक आयु लंबी रहे और भविष्य में अधिक लाभ हो।
डेयरी व्यवसाय आर्थिक रूप से टिकाऊ (Sustainable) बन सके।
पहली और दूसरी बार बछड़ा देने वाली गायें सामान्यतः स्वस्थ, अधिक दूध देने वाली और लंबे समय तक उत्पादक मानी जाती हैं।
खरीद के समय किन बातों की पुष्टि करें?
गाय का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र पशु चिकित्सा अधिकारी से जारी हो।
बछड़ा देने का रिकॉर्ड (Lactation Details) स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो।
गाय रोग-मुक्त और शारीरिक रूप से स्वस्थ हो।
आवश्यक बीमा (3 वर्ष का पशु बीमा और ट्रांजिट बीमा) कराया गया हो।
संक्षेप में, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना में केवल First या Second Lactation की स्वदेशी गायें ही खरीदी जा सकती हैं, ताकि लाभार्थी को अधिक उत्पादन और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिल सके।
ऐसी ही केंद्र व राज्य सरकार की अन्य योजनाओं की जानकारी आपको हमारी वेबसाइट gramg.in पर मिलती रहेगी।

